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तन्नो॑ अन॒र्वा स॑वि॒ता वरू॑थं॒ तत्सिन्ध॑व इ॒षय॑न्तो॒ अनु॑ ग्मन्। उप॒ यद्वोचे॑ अध्व॒रस्य॒ होता॑ रा॒यः स्या॑म॒ पत॑यो॒ वाज॑रत्नाः ॥४॥

English Transliteration

tan no anarvā savitā varūthaṁ tat sindhava iṣayanto anu gman | upa yad voce adhvarasya hotā rāyaḥ syāma patayo vājaratnāḥ ||

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Pad Path

तत्। नः॒। अ॒न॒र्वा। स॒वि॒ता। वरू॑थम्। तत्। सिन्ध॑वः। इ॒षय॑न्तः। अनु॑। ग्म॒न्। उप॑। यत्। वोचे॑। अ॒ध्व॒रस्य॑। होता॑। रा॒यः। स्या॒म॒। पत॑यः। वाज॑ऽरत्नाः ॥४॥

Rigveda » Mandal:5» Sukta:49» Mantra:4 | Ashtak:4» Adhyay:3» Varga:3» Mantra:4 | Mandal:5» Anuvak:4» Mantra:4


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SWAMI DAYANAND SARSWATI

फिर मनुष्यों को क्या वर्त्ताव करके क्या प्राप्त करना चाहिये, इस विषय को कहते हैं ॥

Word-Meaning: - (अध्वरस्य) अहिंसारूप यज्ञ का (होता) ग्रहण करनेवाला मैं सब के प्रति (यत्) जिसका (उप, वोचे) उपदेश करूँ (तत्) उसके और (नः) हम लोगों के (वरूथम्) गृह (अनर्वा) घोड़े जिसके नहीं वह और (सविता) सूर्य्य तथा (तत्) उसको (इषयन्तः) प्राप्त होते वा प्राप्त कराते हुए। (सिन्धवः) नदियाँ वा समुद्र (अनु, ग्मन्) पीछे चलते हैं, जिससे (वाजरत्नाः) विज्ञान धन है जिनके, ऐसे हम लोग (रायः) धन के (पतयः) स्वामी (स्याम) होवें ॥४॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! जो तुम सूर्य्य आदि के सदृश निरन्तर पुरुषार्थी होओ तो लक्ष्मीवान् होओ ॥४॥
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SWAMI DAYANAND SARSWATI

पुनर्मनुष्यैः किं वर्त्तित्वा किं प्राप्तव्यमित्याह ॥

Anvay:

अध्वरस्य होताऽहं सर्वान् प्रति यदुप वोचे तन्नो वरूथमनर्वा सविता तदिषयन्तः सिन्धवोऽनु ग्मन्। येन वाजरत्ना वयं रायः पतयः स्यामः ॥४॥

Word-Meaning: - (तत्) (नः) अस्मान् (अनर्वा) अविद्यमानाश्वः (सविता) सूर्य्यः (वरूथम्) गृहम् (तत्) (सिन्धवः) नद्यः समुद्रा वा (इषयन्तः) प्राप्नुवन्तः प्रापयन्तो वा (अनु) (ग्मन्) अनुगच्छन्ति (उप) (यत्) (वोचे) उपदिशेयम् (अध्वरस्य) अहिंसामयस्य यज्ञस्य (होता) आदाता (रायः) धनस्य (स्याम) भवेम (पतयः) स्वामिनः (वाजरत्नाः) विज्ञानधनवन्तः ॥४॥
Connotation: - हे मनुष्या ! यदि यूयं सूर्य्यादिवत् सततं पुरुषार्थिनः स्यात् तर्हि श्रीमन्तो भवेत ॥४॥
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MATA SAVITA JOSHI

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Connotation: - हे माणसांनो! जर तुम्ही सूर्यासारखे सतत पुरुषार्थी व्हाल तर श्रीमंत बनाल. ॥ ४ ॥